न्यूज डेस्क-15फरवरी2023 : गुवाहाटी हाईकोर्ट ने राज्य में बाल विवाह से जुड़े विभिन्न मामलों में आरोपियों को अग्रिम जमानत देने के साथ ही कहा है कि ये ऐसे मामले नहीं है जिसमें आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जाए। गुवाहाटी हाईकोर्ट के न्यायमूर्ती सुमन श्याम ने कहा कि अगर कोई शादी कानून का उल्लंघन कर के हुई है तो कानून अपना काम करेगा, इस तरह के मामले कोई नए नहीं हैं और ये सब बहुत पहले से होता आ रहा है। हाईकोर्ट ने बाल विवाह विरोधी अभियान चलाने के दौरान पुलिस की कार्य प्रणाली पर नाराजगी जाहिर की। कोर्ट ने सवाल किया कि क्या बिना शिकायत दर्ज कराए आईपीसी की धारा 376लगाई जा सकती है ?
इस प्रकार के मामलों में पाँक्सो एक्ट की क्या जरूरत है। उच्च न्यायालय की पीठ ने कहा कि हम तय करेंगे कि तत्काल पूछताछ की जरूरत है या नहीं,हम आरोपियों को स्टेटमेंट रिकाँर्ड कराने के लिए कहेंगे। लाइव लाँ की एक रिपोर्ट के अनुसार कोर्ट की इस टिप्पणी पर राज्य सरकार के एडवोकेट ने कहा कि यह एक बेहद गंभीर मामला है इस पर जस्टिस सुमन श्याम ने कहा कि यहां पाँक्सो एक्ट की क्या जरूरत है हाईकोर्ट की पीठ ने रेखांकित किया कि हम यहां न किसी को बरी कर रहे हैं ना ही आपको जाँच से रोक रहे हैं, राज्य सरकार कानून के मुताबिक अपना काम करे,
जाँच करे और चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया पूरी करे। अगर कोई दोषी पाया जाता है तो उसे सजा मिलेगी लेकिन इस तरह के कदम से
लोगों की निजी जिंदगी में व्यवधान उत्पन्न हो रहा है
यहां बच्चे हैं, परिवार से जुड़े लोग तथा बुजुर्ग भी है।
उल्लेखनीय है कि न्यायालय ने मंगलवार को नगांव के समसुल हक को अंतरिम जमानत दे दी जिस पर बाल विवाह के एक मामले में आईपीसी की धारा 376(3) के अंतर्गत आरोप लगाया गया था।


