न्यूज डेस्क -13जनवरी
पूर्वोत्तर के राज्य असम के लोक जीवन में परंपरागत उत्सव एवं संस्कृति के रूप में
मनाए जाने वाले पर्व बिहू ने आज पूरे विश्व में अपनी एक खास पहचान बनाई है। देश के विभिन्न क्षेत्रों में मकर संक्रान्ति का पर्व मनाए जाने की परंपरा रही है,भले ही स्थान भेद के कारण इस पर्व को अलग अलग नामों से पुकारा जाता रहा हो। असम भी मुख्य रूप से कृषि प्रधान राज्य के रुप में जाना जाता है। अपने खेत खलिहानों से धान की फसल को पकने के बाद ,अपने घरों में लेकर आने की खुशी में यहां के किसान मकर संक्रान्ति की पूर्व संध्या पर सामुदायिक रुप से भोज का आयोजन करते हैं । एक खास तरीके से निर्माण किए गए घर के चारों तरफ लोग एकत्रित होकर पूरी रात आग तापते हुए भोज का आनंद लेते हैं। इस विशेष रुप से बनाए गए घर को स्थानीय भाषा में भेला घर के नाम से जाना जाता है। स्थानीय महिलाओं द्वारा परंपरागत रूप से बनाए गए व्यंजनों की महक से पूरा वातावरण भीनी भीनी खुशबू से महक उठता है। तिल और गुड़ से बने पीठा नामक व्यंजन के अलावा भी
नारियल एवं गुड़ के लड्डू, मुड़ी,खीर, चिड़वा,दही, कोमल चावलों से निर्मित जलपान बिहू में लोगों की खास पसंद माने जाते हैं।
इस बिहू को स्थानीय भाषा में भोगाली बिहू कहा जाता है।
लोग अपने खेतों में दीप प्रज्वलित करते हैं। अपने पशु धन को नहलाने के साथ ही उन्हें खाद्य पदार्थों से तृप्त करते हैं। अपने से बड़ों को नये वस्त्र प्रदान कर आशीर्वाद ग्रहण करते हैं एवं एक दूसरे को शुभकामनाएं दी जाती है।
विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती है। भले ही असम में भी अब आधुनिकता का प्रभाव जन जीवन पर पड़ने लगा है लेकिन यहां के लोग आज भी असमिया जातिय जीवन में अपनी लोक परंपरा, संगीत, साहित्य,भाषा, परिधान एवं परंपरागत मान्यताओं के प्रति पूरी तरह से जागरूक है जो अपने आप में एक सुखद संकेत है। सभी धर्म संप्रदाय के लोग बिहू को एक सूत्र में बंधकर असमिया जातिय जीवन का महापर्व के रुप में मनाते हुए सामाजिक सौहार्द्र का संदेश देने का जो संदेश देते हैं वह अपने आप में काफी सुखद अनुभव कराता है।
इस भोगाली बिहू के अवसर पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं l


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